IAS शिखर अग्रवाल APO 2026: 40 विला-कॉटेज का मामला क्या है, IPR नियम क्या कहते हैं

IAS शिखर अग्रवाल APO 40 विला-कॉटेज मामला राजस्थान रिसॉर्ट और सरकारी फाइल
IAS शिखर अग्रवाल APO, 40 विला-कॉटेज मामले के बाद पद से हटे

राजस्थान सरकार ने 1993 बैच के वरिष्ठ IAS शिखर अग्रवाल को बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 की देर रात APO (Awaiting Posting Orders) कर दिया। वे अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) के तौर पर उद्योग और MSME जैसे बड़े विभाग संभाल रहे थे। कार्मिक विभाग के आदेश में सिर्फ “प्रशासनिक कारण” लिखा है, लेकिन यह कार्रवाई उस विवाद के ठीक बाद हुई जिसमें उनके परिवार द्वारा एक ही कंपनी से 40 विला-कॉटेज खरीदने और उन्हें उसी कंपनी को लीज पर देने का मामला सामने आया।

IAS शिखर अग्रवाल का नाम आज राजस्थान में सबसे ज़्यादा खोजा जा रहा है, और ज़्यादातर लोग तीन बातें जानना चाहते हैं: पूरा मामला क्या है, APO का मतलब सज़ा है या नहीं, और एक IAS अधिकारी संपत्ति खरीदने के नियम क्या हैं। इस आर्टिकल में ये तीनों बातें तथ्यों के साथ हैं, साथ में UPSC की तैयारी करने वालों के लिए इस मामले की सीख भी।

मुख्य बातें

  • APO का आदेश 28 अक्टूबर 2026 की रात कार्मिक विभाग ने जारी किया, कारण “प्रशासनिक” लिखा गया है। आदेश में संपत्ति विवाद या किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई का ज़िक्र नहीं है।
  • आरोप उदयपुर और अलवर के दो रिसॉर्ट में 40 यूनिट की खरीद से जुड़े हैं, जिनकी कुल कीमत करीब ₹6.16 करोड़ है।
  • सवाल लीज की रकम, संपत्ति रिटर्न (IPR) में दर्ज ब्यौरे और कंपनी को मिले सरकारी निवेश पैकेज पर उठे हैं।
  • शिखर अग्रवाल ने खरीद मानी है और कहा है कि संपत्तियों की जानकारी उनके IPR और आयकर रिटर्न में है।
बिंदुतथ्य
अधिकारीशिखर अग्रवाल, भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), राजस्थान कैडर, 1993 बैच
APO से पहले के पदअतिरिक्त मुख्य सचिव – उद्योग एवं MSME; अध्यक्ष – निवेश संवर्धन ब्यूरो (BIP) राजस्थान; भिवाड़ी एकीकृत विकास प्राधिकरण (BIDA) का ज़िम्मा
कार्रवाईAPO (पदस्थापन आदेश की प्रतीक्षा), अगले आदेश तक
आदेश की तारीख28 अक्टूबर 2026 (बुधवार देर रात)
आदेश में कारणप्रशासनिक कारण
विवादपरिवार के नाम 40 विला-कॉटेज की खरीद और उसी कंपनी को लीज
पत्नीडॉ. प्रशाखा माथुर, IPS, राजस्थान पुलिस में ADG
नई पोस्टिंगअभी घोषित नहीं

IAS शिखर अग्रवाल कौन हैं?

शिखर अग्रवाल राजस्थान कैडर के 1993 बैच के IAS अधिकारी हैं। शिखर अग्रवाल ने IIT कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में B.Tech किया और फिर सिविल सेवा परीक्षा के ज़रिए IAS में आए।

राज्य की नौकरशाही में उनकी गिनती प्रभावशाली अफसरों में होती रही है। 2024 में वे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कार्यालय (CMO) में अतिरिक्त मुख्य सचिव रहे। बाद में उन्हें उद्योग, MSME, निवेश और सार्वजनिक उपक्रम जैसे विभाग मिले, जो सीधे राज्य में आने वाले निजी निवेश से जुड़े हैं। मुख्य सचिव पद की दौड़ में भी उनका नाम लिया जाता था।

IAS शिखर अग्रवाल पर 40 विला-कॉटेज का मामला क्या है?

मामला सबसे पहले दैनिक भास्कर की पड़ताल से सामने आया। आरोप है कि करीब ढाई साल में शिखर अग्रवाल, उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर और परिवार के दूसरे सदस्यों के नाम पर गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी से 40 यूनिट खरीदी गईं। यही कंपनी “अनंता” नाम से रिसॉर्ट चलाती है।

जगहयूनिटरजिस्ट्री
अनंता रिसॉर्ट, बुझड़ा (उदयपुर)20 कॉटेज29 सितंबर 2023
अनंता रिसॉर्ट, अजबगढ़ (अलवर)20 विला27 मार्च 2026
कुल40 यूनिटकुल कीमत करीब ₹6.16 करोड़

खरीद के साथ ही लीज के दस्तावेज़ भी पंजीकृत हुए। इनके तहत ये सभी यूनिट वापस उसी कंपनी को लीज पर दी गईं, जिसके बदले परिवार को सालाना करीब ₹1.80 करोड़ मिलने हैं। 40 में से करीब 28 यूनिट सीधे अधिकारी दंपती के नाम पर हैं।

₹6.16 करोड़ की खरीद और ₹1.80 करोड़ सालाना लीज: सवाल क्यों उठे?

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल लीज की रकम पर है। सीधा हिसाब लगाइए: ₹1.80 करोड़ सालाना लीज, ₹6.16 करोड़ की कीमत का करीब 29% है।

इसका मतलब यह हुआ कि सिर्फ लीज की आमदनी से करीब साढ़े तीन साल में पूरी खरीद कीमत वापस आ जाती है। आम तौर पर मकान या दुकान किराये पर देने से सालाना आमदनी उसकी कीमत का बहुत छोटा हिस्सा होती है। इसीलिए सवाल उठ रहा है कि कीमत बाज़ार भाव से कम थी या लीज की शर्तें असामान्य रूप से फायदेमंद।

हिसाबरकम
कुल खरीद कीमत (40 यूनिट)करीब ₹6.16 करोड़
प्रति यूनिट औसत कीमतकरीब ₹15.4 लाख
सालाना लीज आय (40 यूनिट)करीब ₹1.80 करोड़
प्रति यूनिट औसत सालाना लीजकरीब ₹4.5 लाख
कीमत के मुकाबले सालाना आयकरीब 29%

ध्यान रहे, अभी तक किसी जाँच एजेंसी ने इन सौदों को गलत नहीं ठहराया है। ऊपर का हिसाब सिर्फ यह समझाने के लिए है कि ये आँकड़े सार्वजनिक बहस का विषय क्यों बने।

कंपनी को मिले निवेश पैकेज का सवाल

विवाद का दूसरा हिस्सा सरकारी पैकेज से जुड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोयल फैशन्स को अलवर के अजबगढ़ में होटल-रिसॉर्ट प्रोजेक्ट के लिए राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (RIPS) 2019 के तहत कस्टमाइज़्ड पैकेज मिला। प्रोजेक्ट में कम से कम ₹115 करोड़ के निवेश और 241 रोज़गार का प्रस्ताव है।

वित्त विभाग का यह आदेश 27 मार्च 2026 को जारी हुआ, और उसी दिन अलवर के 20 विला की रजिस्ट्री भी हुई। उस समय शिखर अग्रवाल उद्योग विभाग के ACS थे। इस पैकेज में उनकी कोई व्यक्तिगत भूमिका थी या नहीं, इस पर अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं आया है।

IPR में 14 संपत्तियाँ: सवाल कहाँ से उठा?

IAS और IPS अधिकारियों को हर साल अपनी अचल संपत्ति का ब्यौरा, यानी Immovable Property Return (IPR), सरकार को देना होता है। विवाद इसी रिटर्न पर है।

  • शिखर अग्रवाल ने 7 जनवरी 2026 को दाखिल IPR में 14 संपत्तियाँ दिखाईं।
  • प्रशाखा माथुर के 8 जनवरी 2026 को दाखिल IPR में अचल संपत्ति “शून्य” दर्ज है।
  • सवाल यह है कि जब करीब 28 यूनिट दंपती के नाम पर हैं, तो दोनों के रिटर्न में यह संख्या मेल क्यों नहीं खाती।

शिखर अग्रवाल का पक्ष यह है कि संपत्तियों की जानकारी उनके IPR और आयकर रिटर्न में दिया गया है। यानी वे खरीद से इनकार नहीं कर रहे, बल्कि यह कह रहे हैं कि उन्होंने कुछ छिपाया नहीं। 14 और 28 के अंतर पर उनकी ओर से विस्तृत सफाई अभी सामने नहीं आई है।

APO का मतलब क्या है? सस्पेंशन से कितना अलग

APO यानी Awaiting Posting Orders का मतलब है कि अधिकारी को मौजूदा पद से हटा दिया गया है और उसे अगला पद मिलने तक कोई ज़िम्मेदारी नहीं दी गई है। यह निलंबन (Suspension) नहीं है। अधिकारी सेवा में बना रहता है और उसे वेतन मिलता रहता है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने APO को लेकर दिशानिर्देश देते हुए कहा है कि यह प्रशासनिक ज़रूरत का साधन है, इसे सज़ा या अनुशासनात्मक कार्रवाई के विकल्प की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

तुलनाAPOनिलंबन (Suspension)तबादला (Transfer)
पदपुराना पद छिन जाता है, नया तुरंत नहीं मिलतासेवा से अस्थायी रूप से अलगतुरंत नया पद
वेतनमिलता रहता हैसिर्फ निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance)पूरा वेतन
क्या यह सज़ा है?नहीं, प्रशासनिक कदमसज़ा नहीं, पर गंभीर जाँच का संकेतनहीं
आगे क्यानया पदस्थापन आदेशजाँच, चार्जशीट या बहालीनए पद पर काम

इस मामले में आदेश में संपत्ति विवाद का कोई ज़िक्र नहीं है और न ही किसी विभागीय जाँच की घोषणा हुई है। इसलिए तकनीकी रूप से यह अभी सिर्फ पद से हटाने की कार्रवाई है।

सरकार, विपक्ष और भाजपा ने क्या कहा?

राज्य सरकार ने आदेश के अलावा कोई बयान नहीं दिया है। कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने उच्च-स्तरीय जाँच की माँग की है और मुख्यमंत्री से स्थिति साफ करने को कहा है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने इस पर टिप्पणी से बचते हुए कहा कि तथ्यों का जवाब अधिकारी दंपती खुद दे सकते हैं।

IAS अधिकारी संपत्ति कैसे खरीद सकता है? नियम 16 को समझिए

IAS, IPS और IFoS अधिकारियों पर अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 [All India Services (Conduct) Rules, 1968] लागू होते हैं। संपत्ति से जुड़ी बातें इसके नियम 16 में हैं। इस मामले को समझने के लिए तीन बातें ज़रूरी हैं:

  1. सालाना IPR: हर अधिकारी को पिछले साल (31 दिसंबर तक) की अचल संपत्ति का ब्यौरा 31 जनवरी तक देना होता है। समय पर IPR न देने पर विजिलेंस क्लीयरेंस रोकी जा सकती है, जिसका असर प्रमोशन और प्रतिनियुक्ति पर पड़ता है।
  2. सरकार की जानकारी में सौदा: कोई भी अधिकारी अपने या परिवार के किसी सदस्य के नाम पर खरीद, बिक्री, लीज, गिरवी या उपहार के ज़रिए अचल संपत्ति तभी ले या दे सकता है जब सरकार को इसकी पूर्व जानकारी (Previous Knowledge) हो।
  3. सरकारी कामकाज वाले व्यक्ति से सौदा: अगर सौदा किसी ऐसे व्यक्ति या संस्था से है जिसका उस अधिकारी से सरकारी कामकाज का लेन-देन है, तो सिर्फ जानकारी देना काफी नहीं, सरकार की पूर्व मंज़ूरी (Previous Sanction) लेनी पड़ती है।

तीसरा बिंदु इस विवाद की असली कुंजी है। जिस कंपनी से संपत्ति खरीदी गई, उसी को उद्योग विभाग के दायरे वाली योजना से पैकेज मिला। क्या यह “सरकारी कामकाज का लेन-देन” माना जाएगा, और क्या इसकी मंज़ूरी ली गई थी, यही वह सवाल है जिसका जवाब किसी जाँच से ही तय होगा।

UPSC की तैयारी करने वालों के लिए इसका क्या मतलब है?

यह मामला GS पेपर-4 (नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरुचि) के “हितों के टकराव” (Conflict of Interest) वाले हिस्से का जीता-जागता उदाहरण है। Mains में इसी तरह की केस स्टडी पूछी जाती है, जहाँ कोई काम नियमों में शायद गलत न हो, फिर भी उस पर सवाल उठें।

एक उदाहरण से समझिए। मान लीजिए आप किसी ज़िले के कलेक्टर हैं और एक बिल्डर का बड़ा प्रोजेक्ट आपके दफ्तर में मंज़ूरी के लिए पड़ा है। उसी बिल्डर से आपके रिश्तेदार बाज़ार से सस्ते दाम पर फ्लैट खरीद लेते हैं। हो सकता है आपने फाइल पर कोई गलत फैसला न लिया हो, पर जनता की नज़र में आपकी निष्पक्षता पर सवाल उठ चुका है।

Mains के उत्तर में ऐसे मामलों के लिए तीन चीज़ें लिखी जाती हैं:

  • पूरा खुलासा (Disclosure): सौदे से पहले सरकार को लिखित जानकारी देना।
  • खुद को अलग करना (Recusal): उस व्यक्ति या कंपनी से जुड़ी फाइलों से हट जाना।
  • पारदर्शिता: IPR में हर संपत्ति का सही और पूरा ब्यौरा।

दूसरी सीख नियमों से जुड़ी है। जो उम्मीदवार IAS या IPS बनने का सपना देख रहे हैं, उन्हें यह पता होना चाहिए कि नौकरी मिलने के बाद आपकी और परिवार की संपत्ति भी सरकार की निगरानी में रहती है। यही सख्ती इस सेवा पर जनता के भरोसे की नींव है।

आगे क्या होगा?

अभी शिखर अग्रवाल को कोई नया पद नहीं मिला है। APO की अवधि खत्म होने पर सरकार उन्हें नई पोस्टिंग दे सकती है।

अगर सरकार इस मामले में आगे कदम उठाती है, तो अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के तहत तय प्रक्रिया अपनाई जाती है: पहले स्पष्टीकरण माँगा जाता है, फिर ज़रूरत हो तो आरोप-पत्र (Charge Sheet) और विभागीय जाँच। IAS अधिकारी के खिलाफ बड़ी सज़ा के मामले में केंद्र सरकार की भूमिका भी होती है। फिलहाल ऐसी किसी प्रक्रिया की शुरुआत की घोषणा नहीं हुई है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. IAS शिखर अग्रवाल को APO क्यों किया गया?
कार्मिक विभाग के 28 अक्टूबर 2026 के आदेश में “प्रशासनिक कारण” लिखा है। यह कार्रवाई परिवार द्वारा 40 विला-कॉटेज खरीदने के विवाद के बाद हुई है।

2. APO का मतलब क्या होता है?
APO यानी Awaiting Posting Orders: अधिकारी को पद से हटाकर अगले आदेश तक बिना ज़िम्मेदारी के रखा जाता है। यह निलंबन नहीं है और वेतन मिलता रहता है।

3. शिखर अग्रवाल किस बैच के IAS हैं?
वे राजस्थान कैडर के 1993 बैच के IAS अधिकारी हैं और IIT कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में B.Tech हैं।

4. 40 विला-कॉटेज कहाँ खरीदे गए?
20 कॉटेज उदयपुर के बुझड़ा में (सितंबर 2023) और 20 विला अलवर के अजबगढ़ में (मार्च 2026), दोनों अनंता रिसॉर्ट में। कुल कीमत करीब ₹6.16 करोड़ है।

5. शिखर अग्रवाल ने आरोपों पर क्या कहा?
उन्होंने संपत्तियों की खरीद मानी है और कहा है कि इनकी जानकारी उनके IPR और आयकर रिटर्न में दिया गया है।

6. IAS अधिकारी को IPR कब तक जमा करना होता है?
अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के तहत पिछले साल की अचल संपत्ति का ब्यौरा हर साल 31 जनवरी तक देना होता है।

निष्कर्ष

IAS शिखर अग्रवाल का APO फिलहाल एक प्रशासनिक कार्रवाई है, सज़ा नहीं। असली सवाल तीन हैं: लीज की असामान्य रूप से ऊँची रकम, IPR में दर्ज संख्या का अंतर, और उसी कंपनी को मिला सरकारी पैकेज। इन पर अंतिम राय किसी आधिकारिक जाँच के बाद ही बन सकती है, तब तक ये आरोप ही हैं। UPSC की तैयारी कर रहे हैं तो इस मामले को GS-4 के नज़रिए से देखें:

  1. अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 को पूरा पढ़ें, खासकर संपत्ति वाला नियम 16।
  2. “हितों का टकराव” पर इस मामले को आधार बनाकर 250 शब्दों का एक उत्तर लिखने का अभ्यास करें।
  3. ऐसे मामलों में आगे की आधिकारिक कार्रवाई पर नज़र रखें, क्योंकि Mains और Interview में ताज़ा उदाहरण काम आते हैं।

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Author: Manjesh Singh — Founder and Editor of CollectorBabu.in. This article is based on official notices. About Us

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