
अपडेट: 29 अक्टूबर 2026
UPSC की तैयारी शुरू करने वाले लगभग हर उम्मीदवार के सामने एक सवाल महीनों तक घूमता रहता है: UPSC Optional Subject कौन-सा लें? B.Tech किया है तो क्या इंजीनियरिंग ही लेनी चाहिए, या समाजशास्त्र और राजनीति विज्ञान जैसे विषय बेहतर रहेंगे? हिंदी माध्यम से हैं तो किस विषय में पढ़ने की सामग्री आसानी से मिलेगी?
यह फैसला हल्का नहीं है, क्योंकि Mains के 1750 लिखित अंकों में से 500 अंक सिर्फ इसी एक विषय से आते हैं। इस लेख में आप जानेंगे कि Optional का असली वज़न कितना है, 48 विकल्प कौन-से हैं, GS के साथ किस विषय का कितना मेल है, और अंतिम फैसला लेने से पहले खुद को कैसे परखें।
Quick Summary: Optional चुनने का सीधा फॉर्मूला
Optional वही चुनें जिसमें आपकी रुचि हो, जिसका सिलेबस आप दो बार दोहरा सकें, और जिसके पिछले सालों के सवाल पढ़कर आपको लगे कि आप इनका जवाब लिख सकते हैं। ग्रेजुएशन का विषय मदद करता है, पर यह कोई शर्त नहीं है।
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| परीक्षा | सिविल सेवा परीक्षा (Civil Services Examination – CSE), संघ लोक सेवा आयोग (Union Public Service Commission – UPSC) |
| Optional कहाँ गिना जाता है | सिर्फ Mains में (Prelims में Optional नहीं होता) |
| पेपर | Paper VI और Paper VII (Optional Paper-1 और Paper-2) |
| अंक | 250 + 250 = 500 अंक |
| Mains लिखित परीक्षा कुल | 1750 अंक (मेरिट में गिने जाने वाले) |
| कुल विकल्प | 48 (25 शैक्षणिक विषय + 23 भाषाओं का साहित्य) |
| ग्रेजुएशन विषय की शर्त | नहीं, कोई भी स्नातक कोई भी Optional ले सकता है |
| आधिकारिक वेबसाइट | upsc.gov.in |
Mains में UPSC Optional Subject का वज़न कितना है?
Optional के 500 अंक Mains के लिखित हिस्से का लगभग 28.6% हैं। यानी हर चार में से एक से ज़्यादा अंक इसी विषय से तय होते हैं। इंटरव्यू जोड़कर कुल 2025 अंकों में भी इसका हिस्सा करीब 24.7% बैठता है।
| पेपर | विषय | अंक | मेरिट में गिना जाता है? |
|---|---|---|---|
| Paper A | भारतीय भाषा | 300 | नहीं (सिर्फ क्वालिफाइंग) |
| Paper B | अंग्रेज़ी | 300 | नहीं (सिर्फ क्वालिफाइंग) |
| Paper I | निबंध (Essay) | 250 | हाँ |
| Paper II से V | सामान्य अध्ययन (GS) I, II, III, IV | 4 × 250 = 1000 | हाँ |
| Paper VI और VII | Optional Subject | 2 × 250 = 500 | हाँ |
| व्यक्तित्व परीक्षण | इंटरव्यू | 275 | हाँ |
GS के चार पेपर हर उम्मीदवार के लिए एक जैसे होते हैं, इसलिए वहाँ ज़्यादातर लोगों के अंक एक सीमित दायरे में रहते हैं। Optional में यह दायरा बड़ा होता है। यही वजह है कि अंतिम सूची में आपकी रैंक पर इसका असर इसके 500 अंकों से भी ज़्यादा महसूस होता है।
UPSC Optional Subject List: कुल 48 विकल्प कौन-से हैं?
UPSC के नियमों में 25 शैक्षणिक विषय और 23 भाषाओं का साहित्य शामिल है। साहित्य में संविधान की आठवीं अनुसूची की 22 भाषाएँ और अंग्रेज़ी आती हैं।
25 शैक्षणिक विषय
| समूह | विषय |
|---|---|
| मानविकी और समाज विज्ञान | इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध (PSIR), समाजशास्त्र, लोक प्रशासन, दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, मानवविज्ञान (Anthropology), अर्थशास्त्र |
| विज्ञान | भौतिकी, रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान, भूविज्ञान (Geology), गणित, सांख्यिकी |
| इंजीनियरिंग और चिकित्सा | सिविल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) |
| कृषि | कृषि, पशुपालन एवं पशु चिकित्सा विज्ञान |
| पेशेवर विषय | विधि (Law), प्रबंधन (Management), वाणिज्य एवं लेखाशास्त्र |
23 भाषाओं का साहित्य
असमिया, बांग्ला, बोडो, डोगरी, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, ओड़िया, पंजाबी, संस्कृत, संथाली, सिंधी, तमिल, तेलुगु, उर्दू और अंग्रेज़ी।
क्या ग्रेजुएशन वाला विषय ही Optional लेना ज़रूरी है?
नहीं। UPSC किसी विषय के लिए ग्रेजुएशन की शर्त नहीं रखता। B.Com वाला भूगोल ले सकता है, इंजीनियर समाजशास्त्र ले सकता है, और साहित्य लेने के लिए उस भाषा में डिग्री होना भी ज़रूरी नहीं है।
फिर भी ग्रेजुएशन का विषय एक बड़ी पूँजी है। आप उसकी शब्दावली पहले से जानते हैं और बुनियादी अवधारणाएँ दोबारा नहीं सीखनी पड़तीं। दिक्कत तब होती है जब डिग्री का विषय होने के बावजूद उसमें आपकी रुचि खत्म हो चुकी हो। दो-तीन साल तक रोज़ किसी विषय को पढ़ना और लिखना पड़ता है, इसलिए ऊब जल्दी नुकसान करती है।
| पहलू | ग्रेजुएशन वाला विषय | नया विषय |
|---|---|---|
| शुरुआती समय | कम, बुनियाद पहले से तैयार | ज़्यादा, शुरुआत NCERT स्तर से |
| रुचि | कभी-कभी डिग्री के बाद कम हो जाती है | सोच-समझकर चुना हो तो बनी रहती है |
| GS से मेल | विषय पर निर्भर (तकनीकी विषयों में कम) | आमतौर पर मानविकी विषय चुने जाते हैं, मेल ज़्यादा |
| उत्तर लेखन | तकनीकी विषयों में सटीक और गणनात्मक | विश्लेषण और उदाहरण पर ज़ोर |
| किसके लिए ठीक | जिन्हें अपने विषय में अब भी मज़ा आता है | जो कम से कम 3 महीने नई नींव डालने को तैयार हों |
Optional चुनने के 5 असली पैमाने
- रुचि: पिछले 5 साल के प्रश्नपत्र पढ़िए। अगर सवाल पढ़कर जिज्ञासा जगती है, तो यह अच्छा संकेत है।
- सिलेबस की लंबाई: कुछ विषयों का सिलेबस छोटा पर गहरा है, कुछ का लंबा। सोचिए कि परीक्षा से पहले आप इसे कम से कम दो बार दोहरा पाएँगे या नहीं।
- GS से मेल: जिस विषय का हिस्सा GS और निबंध में भी काम आए, उसमें एक ही मेहनत दो जगह फल देती है।
- माध्यम और सामग्री: हिंदी माध्यम के उम्मीदवार के लिए यह सबसे व्यावहारिक सवाल है। जिस विषय की अच्छी किताबें और हल किए गए प्रश्न हिंदी में मिलते हों, उसमें समय बचता है।
- लेखन का तरीका: गणित और इंजीनियरिंग में उत्तर सही या गलत होता है। मानविकी में तर्क, उदाहरण और प्रस्तुति से अंक बनते हैं। आप किस तरह लिखने में सहज हैं, यह खुद पहचानिए।
GS के साथ किस Optional का कितना मेल है?
मानविकी के विषयों का GS से सीधा जुड़ाव है, जबकि विज्ञान और इंजीनियरिंग में यह मेल कम है। नीचे की तालिका लोकप्रिय विषयों का मेल दिखाती है।
| Optional | GS में कहाँ काम आता है | मेल का स्तर |
|---|---|---|
| PSIR (राजनीति विज्ञान एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध) | GS-2 (संविधान, शासन, अंतरराष्ट्रीय संबंध), निबंध | बहुत ज़्यादा |
| समाजशास्त्र | GS-1 (भारतीय समाज), GS-2 (सामाजिक न्याय), निबंध | ज़्यादा |
| भूगोल | GS-1 (भूगोल), GS-3 (पर्यावरण, आपदा प्रबंधन), Prelims | बहुत ज़्यादा |
| इतिहास | GS-1 (इतिहास, कला-संस्कृति), Prelims | ज़्यादा |
| लोक प्रशासन | GS-2 (शासन), GS-4 (नीतिशास्त्र) | ज़्यादा |
| अर्थशास्त्र | GS-3 (अर्थव्यवस्था), Prelims | मध्यम |
| दर्शनशास्त्र | GS-4 (नीतिशास्त्र), निबंध | मध्यम |
| मानवविज्ञान | GS-1 (समाज) का कुछ हिस्सा | कम से मध्यम |
| गणित, इंजीनियरिंग, चिकित्सा विज्ञान | GS-3 के विज्ञान-प्रौद्योगिकी वाले छोटे हिस्से | कम |
| भाषा साहित्य | निबंध की भाषा और अभिव्यक्ति | कम (पर तैयारी अलग तरह की) |
कम मेल का मतलब कमज़ोर विकल्प नहीं है। तकनीकी विषयों का सिलेबस स्थिर रहता है और करंट अफेयर्स पर कम निर्भर होता है, इसलिए जिन्हें गणना और सूत्रों वाले सवाल पसंद हैं, उनके लिए ये भरोसेमंद रहते हैं।
“स्कोरिंग Optional” का सच: इसका आपके लिए क्या मतलब है?
तैयारी के माहौल में हर साल किसी न किसी विषय को “सबसे स्कोरिंग” कहा जाता है। सच यह है कि UPSC विषय-वार मॉडरेशन या स्कोरिंग का कोई फॉर्मूला सार्वजनिक नहीं करता, और किसी विषय में अंकों का स्तर साल-दर-साल बदलता रहता है। जो विषय एक साल अच्छे अंक देता दिखता है, अगले साल उसी में कठिन पेपर आ सकता है।
इसलिए किसी और के अंकों से ज़्यादा अहम यह है कि उस विषय में आप कितना अच्छा लिख पाते हैं। एक उदाहरण से समझिए। मान लीजिए आपने B.Sc. में भूगोल पढ़ा है और आपको नक्शे बनाना अच्छा लगता है, पर दोस्त कह रहे हैं कि समाजशास्त्र आसान है। अगर आप भूगोल में 270 अंक तक लिखने की क्षमता रखते हैं और समाजशास्त्र में नई शुरुआत करके 250 तक पहुँचते हैं, तो “आसान” विषय ने आपको 20 अंक पीछे कर दिया। अंतिम सूची में 20 अंकों से सैकड़ों रैंक का फर्क पड़ सकता है।
दूसरी बात जो अक्सर नज़रअंदाज़ होती है: जिन विषयों को ज़्यादा उम्मीदवार चुनते हैं, उनमें सफल लोगों की संख्या भी ज़्यादा दिखती है। यह विषय के आसान होने का सबूत नहीं, सिर्फ भीड़ का असर है। फैसला संख्या देखकर नहीं, अपनी पकड़ देखकर लें।
हिंदी माध्यम के उम्मीदवार किन बातों पर ध्यान दें?
Mains के प्रश्नपत्र हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में छपते हैं और आप उत्तर हिंदी में लिख सकते हैं। असली चुनौती सामग्री की होती है। इतिहास, भूगोल, लोक प्रशासन, दर्शनशास्त्र, राजनीति विज्ञान और हिंदी साहित्य में हिंदी में किताबें और पिछले प्रश्नों के हल काफी उपलब्ध हैं।
तकनीकी विषयों और मानवविज्ञान जैसे विषयों में हिंदी की स्तरीय सामग्री कम मिलती है, इसलिए अंग्रेज़ी किताबें पढ़कर हिंदी में उत्तर लिखने का अभ्यास करना पड़ता है। अगर आपकी अंग्रेज़ी पढ़ने की क्षमता अच्छी है तो यह संभव है, वरना इसमें दोगुना समय जाता है। हिंदी साहित्य उन उम्मीदवारों के लिए सोचने लायक विकल्प है जिन्हें कविता, कहानी और आलोचना पढ़ने में सच में रुचि है।
अंतिम फैसले से पहले 15 दिन का खुद का टेस्ट
दो-तीन विषयों में उलझे हैं तो अंदाज़े से नहीं, इस छोटे प्रयोग से तय करें:
| दिन | क्या करें | क्या परखें |
|---|---|---|
| 1-2 | हर पसंदीदा विषय का आधिकारिक सिलेबस प्रिंट करके पढ़ें | कितने टॉपिक पहले से परिचित लगते हैं |
| 3-5 | हर विषय के पिछले 5 साल के प्रश्नपत्र देखें | कितने सवालों का कम से कम मोटा जवाब सूझता है |
| 6-10 | हर विषय की एक मानक किताब के 2 अध्याय पढ़ें | पढ़ते समय रुचि बनी रहती है या ऊब होती है |
| 11-13 | हर विषय में 2 सवालों के 250 शब्दों के उत्तर लिखें | किसमें लिखना स्वाभाविक लगा |
| 14-15 | हिंदी/अंग्रेज़ी सामग्री और GS से मेल की तुलना करें | कौन-सा विषय कुल मिलाकर कम समय में ज़्यादा देगा |
इन 15 दिनों के बाद जो विषय लिखने में सबसे सहज लगे, आमतौर पर वही सही विकल्प होता है।
Optional कब चुनें और बार-बार क्यों न बदलें?
सबसे अच्छा समय तैयारी के शुरुआती 2-3 महीने हैं, जब आप NCERT और GS की बुनियाद बना रहे हों। Prelims से ठीक पहले के महीनों में ज़्यादातर समय Prelims में जाता है, इसलिए Optional की ठोस पढ़ाई उससे पहले शुरू हो जाए तो Mains के लिए समय बचता है।
Optional एक बार परीक्षा के आवेदन में भर देने के बाद उस साल के लिए बदला नहीं जा सकता। अगले प्रयास में नया विषय लेने का विकल्प रहता है, पर बीच में विषय बदलने का मतलब अक्सर 6-8 महीने की मेहनत छोड़ना होता है। बदलें तभी जब ईमानदारी से लगे कि मौजूदा विषय में आप आगे नहीं बढ़ पा रहे, सिर्फ किसी और के अंक देखकर नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. UPSC Optional Subject कितने अंकों का होता है?
Optional के दो पेपर होते हैं, हर एक 250 अंकों का। कुल 500 अंक Mains की 1750 अंकों वाली मेरिट में जुड़ते हैं।
2. UPSC में कुल कितने Optional Subject हैं?
कुल 48 विकल्प हैं: 25 शैक्षणिक विषय और 23 भाषाओं का साहित्य (22 अनुसूचित भाषाएँ और अंग्रेज़ी)।
3. क्या ग्रेजुएशन से अलग विषय Optional ले सकते हैं?
हाँ। किसी भी विषय के लिए ग्रेजुएशन में वही विषय होने की शर्त नहीं है, साहित्य के लिए भी नहीं।
4. क्या Prelims में Optional का कोई पेपर होता है?
नहीं। Prelims में सामान्य अध्ययन और CSAT होते हैं। Optional सिर्फ Mains में आता है।
5. हिंदी माध्यम के लिए कौन-सा Optional अच्छा है?
जिसमें हिंदी में स्तरीय सामग्री मिलती हो और आपकी रुचि हो। इतिहास, भूगोल, लोक प्रशासन, दर्शनशास्त्र, राजनीति विज्ञान और हिंदी साहित्य में सामग्री आसानी से उपलब्ध है।
6. क्या एक बार चुना Optional बदला जा सकता है?
जिस साल का आवेदन भर दिया, उस साल के लिए नहीं। अगले प्रयास के आवेदन में नया विषय चुना जा सकता है।
7. क्या कोई Optional हमेशा ज़्यादा अंक देता है?
नहीं। विषयों में अंकों का स्तर हर साल बदलता है। आपकी अपनी पकड़ और उत्तर लेखन ही अंक तय करते हैं।
निष्कर्ष
UPSC Optional Subject का फैसला Mains के 500 अंकों और कई सालों की मेहनत से जुड़ा है, इसलिए इसे भीड़ या “स्कोरिंग” की चर्चा के भरोसे न छोड़ें। रुचि, सिलेबस, GS से मेल और अपने माध्यम में सामग्री, इन चार चीज़ों को साथ रखकर देखें। आगे के तीन कदम:
- अपने 2-3 पसंदीदा विषयों की सूची बनाइए और उनका आधिकारिक सिलेबस upsc.gov.in के नोटिफिकेशन से निकालिए।
- ऊपर दिया 15 दिन का टेस्ट पूरा कीजिए और हर दिन की अपनी प्रतिक्रिया लिख लीजिए।
- विषय तय होते ही उसकी एक मानक किताब और पिछले 10 साल के प्रश्नपत्रों से पढ़ाई शुरू कीजिए।
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लेखक: Manjesh Singh — CollectorBabu.in के संस्थापक और संपादक। इस लेख की जानकारी आधिकारिक सूचना के आधार पर तैयार की गई है। हमारी संपादकीय नीति